Dr. Bashir Mahmud Ellias's Blog

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Beware of Wahabi Zakir Naik

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ওহাবী জাকির নায়েক থেকে সাবধান !!!

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মাত্র  এক  বছর  আগেও  ডাঃ  জাকির  নায়েক  ছিলেন  আমার  দৃষ্টিতে  পৃথিবীর  সেরা  মানুষ  আর  এখন  তিনি  আমার  দৃষ্টিতে  পৃথিবীর  সবচেয়ে  নিকৃষ্ট  মানুষ।  কারণ  বছর  খানেক  আগে  এক  বক্তৃতায়  সে  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)  সম্পর্কে  মন্তব্য  করেছিল  যে,  “……যো  সক্‌‌স  মর  চুকা  হ্যায় /…….যেই  লোক  মইরা  গেছে” ।  আপনারা  যদি  তার  বক্তৃতার  ভিডিওটি  দেখেন,  তবে  দেখবেন,  সে  এমন  তাচ্ছিথ্যের  সাথে  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-এর  মৃত্যুর  ব্যাপারটি  বর্ণনা  করেছে  যেন,  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-এর  মৃত্যু  হয়েছে  একটি  ভালো  কাজ  হয়েছে !  একটি  ঝামেলা  বিদায়  হয়েছে !! (নাউজুবিল্লাহ)।  পৃথিবীর  বড়  বড়  আলেমদের  মতে,  যার  উসীলায়  আল্লাহ  তা’আলা  এই  মহাবিশ্বকে  সৃষ্টি  করেছেন,  আল্লাহ‌র  প্রিয়  বন্ধু  সেই  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)  সম্পর্কে  এমন  তাচ্ছিল্যপূর্ণ  মন্তব্য  করা  চরম  বেয়াদবীর  শামিল  এবং  কুফরী।  কেননা  মুসলমানরা  পরস্পরকে  যেভাবে  সম্বোধন  করে  অথবা  একে  অপরের  সাথে  যে  ভাষায়  কথা  বলে,  এরকম  ভাষা / সম্বোধন  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-এর  সম্পর্কে  ব্যবহার  করতে  পবিত্র  কোরআনে  আল্লাহ  তায়ালা  কঠোরভাবে  নিষেধ  করে  দিয়েছেন।  আল্লাহ  নিজে  যেখানে  তার  বন্ধুকে  মানহানি  হবে  বলে  কখনও  নাম  ধরে  ডাকেন  নাই ;  বরং  নবী,  রাসুল,  রাহমাতাল্লিল  আলামীন,  কমলিওয়ালা,  চাদরওয়ালা  প্রভৃতি  মিষ্টি  মধুর  নাম  ধরে  ডেকেছেন।  অথচ  সামান্য  উম্মত  হয়ে  জাকির  নায়েক  সেই  মহামানবকে  “যেই  লোক”  বলে  সম্বোধন  করে !!!  জাকির  নায়েক  তো  ছাই-ভস্ম,  স্বয়ং  সাহাবায়ে  কেরামদেরই [যাদের  মর্যাদা  বড়  বড়  আওলিয়াদেরও  অনেক  অনেক  উপরে  এবং  যেই  সাহাবায়ে  কেরাম  নবী  করীম  (সাঃ)-এর  চোখের  ঈশারায়  নিজেদের  জীবন  উৎসর্গ  করে  দিতে  কুন্ঠা  বোধ  করত  না]  আল্লাহ‌  চরম  কঠোর  ভাষায়  হুশিয়ার  করে  দিয়েছেন   যে,  তোমরা  যদি  আমার  বন্ধুর  সাথে  সামান্য  থেকে  সামান্যতম  বেয়াদবী  কর,  তবে  তোমাদের  সারা  জিন্দেগীর  কর্ম  বরবাদ  হয়ে  যাবে  এবং  তোমাদেরকে  জাহান্নামে  নিক্ষেপ  করা  হবে।  এজন্যই  পারস্যের  জনৈক  কবি  বলেছিলেন  যে,  “আল্লাহ‌র  সাথে  তুমি  স্বাধীনতা  ভোগ  করতে  পারো  কিন্তু  মোহাম্মদ  (সাঃ)-এর  ব্যাপারে  সাবধান”।  মনে  হয়  জাকির  নায়েকের  বিশ্বজোড়া  খ্যাতি  এবং  অনেক  অমুসলিম  তার  হাতে  ইসলাম  গ্রহন  করায়  তার  পেটে  অহংকার  ঢুকে  গেছে।  আর  অহংকার  হলো  পতনের  মূল।  সে  মনে  হয়  এখন  নিজেকে  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-এর  সমান  বা  তার  চেয়েও  বড়  কিছু  ভাবতে  শুরু  করেছে।

 

আসলে  অন্যকে  হেদায়েত  করতে  যাওয়ার  আগে  বরং  প্রথমে  আমাদের  ওপর  ফরজ  হলো  কুফরী,  শেরেকী,  মুনাফেকী,  অজ্ঞতা,  রিয়া,  লোভ,  অহংকার,  হিংসা,  ঘৃণা,  লালসা  ইত্যাদি  দোষ  থেকে  নিজেকে  পবিত্র  করা।  তারপর  অন্যের  হেদায়েতের  জন্য  চেষ্টা  করা  উচিত।  কোরআনে  বলা  হয়েছে,  অন্যরা  পবিত্র  হয়েছে  কিনা  সে  সম্পর্কে  তোমাদেরকে  প্রশ্ন  করা  হবে  না ;  বরং  তুমি  নিজের  আত্মাকে  পবিত্র  করতে  পেরেছো  কিনা  তাই  যাচাই  করা  হবে।  জাকির  নায়েক  যদি  কোন  হক্কানী  আলেম  বা  কোন  কামেল  পীরের  সহায়তায়  প্রথমে  নিজের  আত্মশুদ্ধির  জন্য  চেষ্টা  করতেন  তবে  তা  আরো  বেশী  ভালো  হতো।  কেউ  যদি  ইসলাম  বা  মুসলমানদের  কল্যাণে  কোন  অবদান  রাখতে  সক্ষম  হন,  তবে  তাতে  আমি  বিরাট  কিছু  হয়ে  গেছি  এমন  অহংকার / গর্ব  করা  অনুচিত।  কেননা  হাদীসে  আছে  যে,  আল্লাহ‌  তায়ালা  কাফেরদের  দিয়েও  ইসলামের  উপকার  করে  থাকেন।  উদাহরণস্বরূপ  আমেরিকার  টুইন  টাওয়ারে  বিমান  হামলার  কথা  বলা  যায়।  এই  ঘটনা  ইহুদী  অথবা  খ্রিস্টানরা  ঘটিয়েছে  অথচ  ইহার  ফলস্রুতিতে  সারা  বিশ্বে  প্রায়  এক  কোটির  মতো  অমুসলিম  ইসলাম  গ্রহন  করেছে।  জাকির  নায়েক  তার  বক্তৃতায়  বলে  থাকেন  যে,  ইহুদী-খ্রীস্টানরা  যাতে  তার  বক্তৃতা  শুনতে  আগ্রহী  হয়  এজন্য  তাকে  ইহুদী-খ্রীস্টানদের  পোষাক  শার্ট-প্যান্ট-কোট-টাই  পড়ে  বক্তৃতা  করতে  হয়।  অথচ  দেখেন  মহান  আল্লাহ‌  তায়ালা  টুইন  টাওয়ারে  বিমান  হামলার  ঘটনার  মাধ্যমে  ইহুদী-খ্রীষ্টানদের  মধ্যে  ইসলামকে  জানার  এমন  আগ্রহ  সৃষ্টি  করে  দিয়েছেন  যে,  তারা  নিজেরাই  কোরআন-হাদীস  সংগ্রহ  করে  পড়ে  পড়ে  ধ্যানাধ্যান  মুসলমান  হয়ে  যাচ্ছে।  কোন  শার্ট-প্যান্ট-কোট-টাই  পড়া  মাওলানার  ওয়াজ  শুনার  জন্য  তাদের  অপেক্ষা  করা  লাগে  নাই।

 

দ্বিতীয়ত  বছর  খানেক  আগে  আরেকটি  বক্তৃতায়  জাকির  নায়েক  ইমাম  হুসাইন (রাঃ)-এর  খুনী  কুখ্যাত  ইয়াজিদের  নামের  সাথে  “রাদিআল্লাহু  আনহু / তার  ওপর  আল্লাহ  সন্তুষ্ট  হউন / অর্থাৎ  তাকে  জান্নাত  দান  করুন”  উচ্চারণ  করেছে।  যেই  ইমাম  হুসাইন  (রাঃ)  জান্নাতবাসীদের  সরদার  হবেন  এবং  যাকে  সালাম  না  দিলে  নামাজই  কবুল  হয়  না,  সেই  ইমাম  হুসাইন (রাঃ)-কে  যে  পৈশাচিক  ভাবে  হত্যা  করেছে,  যে  নবী  পরিবারের  সত্তরজন  সদস্যকে  নির্মম  ভাবে  খুন  করেছে,  যে  ইমাম  হুসাইনের (রাঃ)  পবিত্র  ছিন্ন  মস্তকে  এবং  ঠোট  মোবারকে  লাঠি  দিয়ে  আঘাত  করেছে,  যে  পবিত্র  মদীনায়  সৈন্য  পাঠিয়ে  দশ  হাজার  মুসলমানকে  হত্যা  করেছে  যাদের  মধ্যে  সাতশ  জন  ছিলেন  রাসুল (সাঃ)-এর  সাহাবী,  যার  হুকুম  পেয়ে  তার  সৈন্যরা  তিন  দিনে  মদীনা  শরীফের  দশ  হাজার  কুমাড়ী  মেয়েকে  ধর্ষণ  করেছিল,  যার  হুকুমে  তার  সৈন্যরা  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-এর  পবিত্র  সমাধি  এবং  মসজিদে  নববীতে  তিন  দিন  ঘোড়া-গাধা-উট  চড়িয়েছে,  যার  অত্যাচারে  মসজিদে  নববীতে  তিন  দিন  কোন  আজান-একামত  হতে  পারে  নাই,  যার  হুকুমে  পবিত্র  কাবা  ঘরের  গিলাফ  আগুন  দিয়ে  জ্বালিয়ে  দেওয়া  হয়েছিল,  সেই  মহাপাপী  জাহান্নামের  কীট  কুখ্যাত  ইয়াজিদের  জন্য  যে  আল্লাহ‌র  কাছে  জান্নাত  লাভের  দোয়া  করে,  তার  মানসিকতা  কতো  জঘন্য  হতে  পারে  তা  ভাবাই  যায়  না।  আল্লাহ‌র  দুশমন  এই  ইয়াজিদের  তো  মরণের  সময়  তওবাও  নসীব  হয়  নাই ;  হইলেও  কবুল  হয়  নাই।  কোরআন-হাদীস  মতে,  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)  হলেন  সমগ্র  সৃষ্টিকুলের  সরদার  এবং  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-এর  কন্যা   হযরত  ফাতেমা (রাঃ)  জান্নাতী  নারীদের  সরদার  এবং  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-এর  দুই  নাতী  ইমাম  হাসান-হুসাইন (রাঃ)  জান্নাতী  পুরুষদের  সরদার  হবেন।  অগণিত  সহীহ  হাদীস  মতে,  যে  বা  যারা  হযরত  ফাতেমা  (রাঃ)  অথবা  ইমাম  হাসান-হুসাইন (রাঃ)-কে  কষ্ট  দিল,  সে  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-কেই  কষ্ট  দিলো  এবং  যে  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-কে  কষ্ট  দিলো  সে  আল্লাহকেই  কষ্ট  দিলো  আর  যে  আল্লাহকে  কষ্ট  দিলো  তার  ধ্বংস  নিশ্চিত।  উপরোক্ত  চারজনের  কাউকে  কষ্ট  দেওয়া  অথবা  যে  কষ্ট  দিলো  তাকে  সমর্থন  দেওয়া  একই  অপরাধ।  সে  যাক,  জাকির  নায়েকের  মুখ  থেকে  উপরোক্ত  দুটি  কুৎসিত  কথা  বের  হওয়ার  পর  থেকে  সারা  দুনিয়ার  কোটি  কোটি  আলেম-ওলামা-পীর-মাশায়েখ-সচেতন  মুসলমানরা  তাকে  অন্তর  থেকে  ধিক্কার  দিতেছে !!!

 

 

জাকির  নায়েক  যেভাবে  পথভ্রষ্ট  হলেন !!!  প্রথম  কথা  হলো  জাকির  নায়েক  নিজে  নিজে  কোরআন-হাদীস  পড়ে  মাওলানা  হয়েছেন।  কোন  মাদ্রাসায়  যান  নাই  এবং  তার  কোন  ওস্তাদ  বা  শিক্ষক  ছিল  না।  এই  ধরনের  লোকেরা  সাধারণত  ইসলামের  মূল  স্পিরিট  বা  মর্ম  বুঝতে  পারেন  না।  ফলে  নিজেও  পথভ্রষ্ট  হয়  এবং  সাথে  সাথে  তার  অনুসারীদেরকেও  পথভ্রষ্ট  করে।  ইতিহাসে  এমনটাই  দেখা  গেছে।  এই  রকম  বেশ  কয়েকজন  লোক  আছেন  যারা  নিজে  নিজে  কোরআন-হাদীস  পড়ে  লেংড়া  মাওলানা  হয়েছে  এবং  কোটি  কোটি  মানুষকে  পথভ্রষ্ট  করে  জাহান্নামে  পাঠিয়েছে ।  নিজে  নিজে  কোরআন-হাদীস  পড়ে  যদি  হেদায়েত  পাওয়া  যেতো,  তবে  আল্লাহ‌  তায়ালা  ফেরেশতাদের  দিয়ে  সাহাবায়ে  কেরামদের  নিকট  কোরআন-হাদীস  পাঠিয়ে  দিতেন।  ওস্তাদ  হিসাবে  আর  রাসুলুল্লাহ (সাঃ)-কে  পাঠাতেন  না।  আমরা  যদি  সোনালী  যুগের  মুসলমানদের  ইতিহাস  পড়ি  তাহলে  দেখতে  পাই  যে,  তখনকার  মুসলমানরা  একেকজন  শত-শত  এমনকি  কেউ  কেউ  হাজারে  হাজার  ওস্তাদের  কাছ  থেকে  ইলমে  শরীয়ত  শিক্ষা  করতেন  এবং  শত-শত  পীর-আওলিয়ার  কাছ  থেকে  ইলমে  মারেফাত  শিক্ষা  করতেন।  এজন্য  তাদের  জ্ঞান  অর্জন  ত্রুটিমুক্ত  ছিল।  এখনকার  দিনেও  যারা  মাদ্রাসায়  ইলমে  দ্বীন  শিড়্গা  করেন,  তারাও  অনত্মত  পাঁচ  থেকে  দশ  জন  ওসত্মাদের  সহায়তা  পেয়ে  থাকেন।  কিন’  যার  নিদেনপড়্গে  পাঁচ  জন  ওসত্মাদও  নাই,  তারপড়্গে  পথভ্রষ্ট  হওয়া  খুবই  সহজ।  এই  ধরনের  লোকেরা  সহজেই  কোন  জাহান্নামী  ফেরকায়  যোগ  দেয়  অথবা  নিজেই  কোন  পথভ্রষ্ট  দল / গোমরাহ  ফেরকার  সৃষ্টি  করে।  সৌদি  আরবের  অভিশপ্ত  শয়তান  আবদুল  ওয়াহ্‌্‌হাব  নজদী  একশ  বছর  আগে  যেই  ওহাবী  ফেরকার  জন্ম  দিয়ে  গেছে,  সৌদি  রাজারা  তেলের  টাকা  খরচ  করে  সেই  জাহান্নামী  মতবাদ  সারা  মুসলিম  বিশ্বে  ছড়িয়ে  দিতে  সড়্গম  হয়েছে।  জাহান্নামী  ওহাবীদের  গত  একশ  বছরের  সবচেয়ে  বড়  সাফল্য  হলো  জাকির  নায়েকের  মতো  একজন  শ্রেষ্ট  বক্তাকে  টাকা  দিয়ে  তাদের  দলে  ঢুকাতে  পারা।  জাকির  নায়েকের  কোন  ইনকাম  নাই,  তার  টিভি  চেনেলগুলোতে  কোন  বিজ্ঞাপনও  প্রচার  হয়  না।  বিষেশজ্ঞদের  মতে,  তার  টিভি  চেনেলগুলো  চালানোর  খরচ  কোটি  কোটি  টাকা  সৌদি  ওহাবীরা  দিয়ে  থাকে।  অভিজ্ঞ  মহলের  মতে,  সারা  দুনিয়ার  ৯৫%  ভাগ  সুন্নী  আলেম-ওলামা  এবং  মাদ্রাসা  জেনে  নাজেনে  বর্তমানে  ওহাবী  মতবাদে  আক্রানত্ম  হয়ে  পড়েছে।  আর  এদেরকে  প্রকৃত  সুন্নী  আদর্শে  ফিরিয়ে  আনা  যে  কতো  কঠিন  কাজ  তা  ভাবতেই  গা  শিউরে  ওঠে।

 

আলেমরা  কেন  জাকির  নায়েক-কে  ঘৃণা  করে ?  আসলে  কোরআন-হাদীসে  বিশেষজ্ঞ  হওয়ার  কারণে  আলেমরা  জাকির  নায়েকের  ১০  মিনিটের  লেকচার  শুনেই  সে  যে  অভিশপ্ত  ওহাবী  মতবাদ  প্রচার  করে  তা  বুঝতে  পারেন।  কিন’  সাধারণ  মুসলমানরা  কোরআন-হাদীস  সম্পর্কে  যথেষ্ট  জ্ঞান  না  থাকার  কারণে  জাকির  নায়েকের  লেকচার  ১০  বছর  শুনেও  তা  বুঝতে  পারবে  না।  সত্যি  বলতে  জাকির  নায়েক  কোন  আলেম  না,  বরং  সে  হলো  তুলনামূলক  ধর্মতত্ত্বের (Comparative  religion)  একজন  পন্ডিত (অর্থাৎ  কোরআন,  বাইবেল,  গীতা,  ত্রিপিটক  ইত্যাদি  ধর্মগ্রন্থে  কি  কি  মিল  এবং  অমিল  আছে,  সেই  বিষয়ের  বিশেষজ্ঞ)।  সে  যতদিন  তার  বিষয়  নিয়ে  ছিল,  ততদিন  কোন  ভূল  করেনি  এবং  কারো  সমালোচনার  শিকারও  হয়নি।  কিন্তু  যখনই  সে  আলেম/মুফতী  না  হয়েও  বিভিন্ন  বিষয়ে  ফতোয়া  দেওয়া  শুরু  করল,  তখনই  সে  মারাত্মক  সব  ভুল  করতে  শুরু  করল  এবং  আলেম  সমাজের  নিকট  তীব্র  সমালোচনার  টার্গেটে  পরিণত  হলো।  যদিও  আহমদ  দীদাতকে  জাকির  নায়েকের  ওস্তাদ  মনে  করা  হয়,  কিন্তু  সত্যি  বলতে  কি  তাদের  দুজনের  মধ্যে  দেখা-সাক্ষাত  খুব  কমই  হয়েছে।  কারণ  দুজনের  বাড়ি  দুই  মহাদেশে,  হাজার  মাইল  দূরে।  আহমদ  দীদাত  সারাজীবন  তাঁর  সাবজেক্ট  নিয়েই  ছিলেন,  কখনও  আলেম-মুফতী  সেজে  সব  বিষয়ে  ফতোয়া  দিতে  শুরু  করেন  নাই।  তাছাড়া  আহমদ  দীদাত  ছিলেন  পাকিস্তানের  বিশ্বখ্যাত  আলেম  ও  পীর  ডঃ  তাহের  উল  কাদেরীর  মুরীদ।  সুযোগ্য  পীরের  সান্নিধ্য  এবং  পথনির্দেশনার  কারণেই  অভিশপ্ত  ওহাবীরা  আহমদ  দীদাতকে  ব্রেনওয়াশ  করতে  পারে  নাই,  কিনতে  পারে  নাই।  এইজন্য  আহমদ  দীদাত  মৃত্যুর  পূর্ব  পর্যন্ত  সকলের  নিকট  সম্মানিত  ও  সকল  বিতর্কের  উর্ধে  ছিলেন।

 

যারা  জাকির  নায়েকের  বিরোধী  তারাও  স্বীকার  করেন  যে,  তার  কথা  শতকরা  ৯৯  ভাগই  সঠিক । মাত্র  এক  ভাগ  বা  আধা  ভাগ  ভেজাল ।  এখন  কথা  হলো  কেউ  যদি  আপনাকে  ৯৯  লিটার  দুধের  সাথে  এক  লিটার  বিষ  মিশিয়ে  দেয়,  তাহলে  কি  আপনি  সেই  দুধ  খেতে  রাজী  হবেন ?  এই  উম্মতের  আলেমরা  ইহুদীদের  নবীদের  সমান  মর্যাদা  সম্পন্ন,  আলেমরা  মর্যাদায়  কখনও  মূর্খদের  সমান  হতে  পারে  না,  আলেমরা  আল্লাহকে  সবচেয়ে  বেশী  ভয়  করে  চলেন,  আলেমদের  ঘুম  মূর্খদের  ইবাদতের  সমান  ইত্যাদি  ইত্যাদি  অনেক  মর্যাদার  কথা  আলেমদের  সম্পর্কে  কোরআন-হাদীসে  বলা  আছে ।  আবার  একথাও  বলা  আছে  যে,  পথভ্রষ্ট-ধান্ধাবাজ-নষ্ট  আলেমদের  পরকালে  সবচেয়ে  বেশী  শাস্তি  হবে । জাহান্নামে  তাদের  ভয়ঙ্কর  শাস্তি  দেখে  এমনকি  অন্যান্য  জাহান্নামীরাও  আশ্চর্য  হয়ে  তাকিয়ে  থাকবে । এক  একজন  আলেমকে  হাজার  হাজার  লক্ষ  লক্ষ  এমনকি  কোটি  কোটি  সাধারণ  মুসলমান  অনুসরন  করে  থাকে ।  এই  কারণে  আলেমদের  ভুল-ত্রুটিও  ইসলাম  এবং  মুসলমানদের  বেলায়  খুবই  মারাত্মক  ফল  বয়ে  আনে ।  সাধারণ  মুসলমানের  ভুল  আর  আলেমদের  ভুল  কখনও  এক  হতে  পারে  না ।  আমাদেরকে  মনে  রাখতে  হবে  যে,  ইবলিস  শয়তান  এমন  একজন  শ্রেষ্ট  আলেম  ছিলেন  যে  কিনা  ফেরেশতাদের  শিক্ষকতা  করতো ।  কিন্তু  নবীর  সাথে  বেয়াদবীর  কারণে  আল্লাহ  তাকে  অভিশপ্ত  কাফের বানিয়ে  বিতাড়িত  করে  দিয়েছেন ।  এই  শয়তান  কত  হাজার  কোটি  বনি  আদমকে  কাফির-মোশরেক-মুনাফিক  বানিয়ে  জাহান্নামে  পাঠিয়েছে,  তার  হিসাব  একমাত্র  আল্লাহ  জানেন । বাইবেল-তাওরাতসহ  পূর্ববর্তী  অগণিত  কিতাবকে  বিকৃত  করে  যারা  কোটি  কোটি  মানুষকে  পথভ্রষ্ট  করে  জাহান্নামে  পাঠিয়েছে,  তারাও  কিন্তু  প্রত্যেকে  আলেম  ছিলেন ।  কোরআন-হাদীসের  অপব্যাখ্যা  করে  যারা  খারেজী,  রাফেজী,  শিয়া,  কাদিয়ানী,  মুতাজিলা,  ওহাবী  প্রভৃতি  পথভ্রষ্ট  দলের  সৃষ্টি  করে  কোটি  কোটি  মুসলমানকে  জাহান্নামে  পাঠিয়েছে,  তারাও  কিন্তু  (ধান্ধাবাজ)  আলেম  ছিলেন ।  কাজেই  কিছু  সংখ্যক  আলেমদের  কেন  জাহান্নামে  সবচেয়ে  বেশী  শাস্তি  হবে,  তা  নিষ্চয়  বুঝতে  পারছেন । আবদুল্লাহ  ইবনে  সাবাহ  নামক  যেই  ইহুদী  ইসলাম  গ্রহন  করে  সাহাবায়ে  কেরামগণের  মধ্যে  চক্রান্ত  করে  যুদ্ধ  বাধিয়ে  হাজার  হাজার  সাহাবীকে  শহীদ  করেছিলেন,  সেও  কিন্তু  একজন  বড়  আলেম  ছিলেন । একজন  আলেম  কখনও  ভুল  করতে  পারেন  না  এবং  তার  সব  কথাই  মেনে  চলতে  হবে,  এমন  যদি  কারো  বিশ্বাস  হয়,  তবে  তার  পক্ষে  ঈমান  নিয়ে  কবরে  যাওয়া  মুশকিল  হতে  পারে ।  সবচেয়ে  বড়  কথা  হলো,  আলেমদের  ভুল-ত্রুটি  দুই  রকমের  হয়ে  থাকে ।  তার  একটি  হলো  ঈমান  সংক্রান্ত  এবং  আরেকটি  আমল  সংক্রান্ত ।  ঈমান (আকিদা-বিশ্বাস)  সংক্রান্ত  ভুল  এমনই  মারাত্মক  যে,  মাত্র  একটি  ভুলের  জন্য  আপনি  কাফের-মোশরেক  হয়ে  যেতে  পারেন ।  একদিকে  দেখা  গেলো  যে,  আপনি  কাফের  হয়ে  বসে  আছেন  আবার  সারাজীবন  অনেক  কষ্ট  করে  নামাজ-রোজা-হজ্জ-যাকাত-তাবলীগ-জিহাদ  ইত্যাদি  আমলও  করছেন ।  ফলে  আপনার  দুনিয়াও  গেলো  আবার  আখেরাত  গেলো !!! ইহার  চাইতে  বরং  দুনিয়াতে  খাও-দাও-ফূর্তি  করো  স্টাইলে  চললেই  ভালো  হতো ।  ঈমানের  ব্যাপারে  ভুল  ধারনা /  না  জানার  কারণে  আখেরাতে  অনেকেই  এমন  পরিস্থিতির  শিকার  হবেন ।  অন্যদিকে  আমল  সংক্রান্ত  ভুলের  পরিণতি  এমন  মারাত্মক  নয়  বরং  অনেক  হালকা ।  অনেক  সময়  আমল  সংক্রান্ত  হাজারটা  ভুলের  কারণেও  আপনার  কাফের-মোশরেক  হওয়ার  সম্ভাবনা  কম ।  ফলে  নামাজ-রোজা-হজ্জ-যাকাত-জিহাদ-তাবলীগ-সচ্চরিত্র-লেনদেন  ইত্যাদি  সংক্রান্ত  আমলে  হাজারটা  ভুলের  কারণে  যদি  কোটি  কোটি  বছরও  জাহান্নামে  থাকতে  হয়,  তথাপি  ঈমান  থাকার  কারণে  একদিন  না  একদিন  সেখান  থেকে  মুক্তি  পেয়ে  জান্নাতে  যেতে  পারবেন ।  কিন্তু  ঈমান  সংক্রান্ত  অজ্ঞতা / ভুলের  কারণে  যদি  কাফের-মোশরেক  হয়ে  পড়েন  এবং  সেই  অবস্থায়  মৃত্যু  হয়ে  যায়,  তবে  শত  শত  বছর  নামাজ-রোজা-হজ্জ-যাকাত-জিহাদ-তাবলীগ  ইত্যাদি  আমল  করেও  বেহেশতে  যাওয়ার  কোনই  আশা  নাই । বিভিন্ন  কারণে  মানুষ  ঈমানহারা  হতে  পারে  এবং  পরে  সে  তার  ভুল  বুঝতেও  পারে  এবং  তওবা  করে  পুণরায়  ঈমান  এনে  মুসলমান  হয়ে  জান্নাত  লাভের  সৌভাগ্য  পেতে  পারে ।  কিন্তু  মহানবীর (সাঃ)  সাথে  বেয়াদবী / অসৌজন্যমূলক  আচরণ / সম্মানহানীকর  ধারণা-বিশ্বাস  করা  আল্লাহর  দৃষ্টিতে  এমনই  মহাপাপ  যে,  সে  যে  কাফের  হয়ে  গেছে,  এটা  বুঝার  ভাগ্যও  আল্লাহ  তাকে  দেন  না । ফলে  সে  মনে  মনে  ভাবতে  থাকে  যে,  সে  এখনও  মোমিন-মুক্তাকী-ওলী-আওলিয়া-পীর-বুজুর্গই  আছে,  বেঈমান  হয়  নাই ।  এদিকে  যে  তার  ঈমান-আমল  সব  শেষ  হয়ে  গেছে,  কপাল  পোড়া  তা  জানতেও  পারে  না ।  কাজেই  অন্যান্য  বেঈমানদের  মতো  তওবা  করে  তার  পক্ষে  আর  নতুন  করে  ঈমান  এনে  জাহান্নাম  থেকে  বাঁচার  সৌভাগ্যও  হয়  না ।  এখন  বুঝুন  যে  আল্লাহ  তার  প্রিয়  বন্ধু  মোহাম্মদ (সাঃ)-এর  সাথে  বেয়াদবী  করা  লোকদের  ওপর  কতটা  অসন্তুষ্ট  হন ।  (আল্লাহ  আমাদের  সকলকে  তাঁর  বন্ধুর  ওসীলায়  দুই  জাহানে  রক্ষা  করুন । আমিন )

 

 

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Author: bashirmahmudellias

I am an Author, Design specialist, Islamic researcher, Homeopathic consultant.

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